Friday, January 7, 2011

ओस की बूँदें


बचपन के दिन भी बहुत खूब थे,

याद आता है बारिश में भीगना और सर्दी में कोहरे में ठिठुरना
सुबह सुबह ओस की बूंदों से नम, भीगी भीगी घास पे चलना

मन को ये सब कितना भाता था

पापा का सूरज उगने से पहले उठाना और सैर पे ले जाना
नींद में उठ कर जब हम पैर पटकते पीछे पीछे चल देते
तो वो दौड़ कर पार्क के दस चक्कर लगाने को कहते
कितना खलता था तब देर तक ना सो पाना

मगर कुछ भी हो दूब की वो ताज़ी हरी नुकीली पतियाँ
पैरों को छू तरो-ताज़ा कर देती, और नींद काफूर हो जाती थी

मम्मी का ठण्ड बहुत है कह कर दो स्वेटर पहनाना
और हमने रास्ते में में ही एक को निकाल जाना
सर पर टोपी या स्कार्फ बांधना बिलकुल ना भाता
हेयर स्टाइल खराब हो जाएगा, ये ख्याल जो रहता

ठण्ड लग जाने का डर तब नहीं सताता था
और घने कुहरे में खेलने में मज़ा बहुत आता था

Sunday, December 12, 2010


कल्पनाओं से साकार होती, हवाओं में बनती बिगडती, कुछ तस्वीरें.....

Wednesday, December 1, 2010

First day of the Last month of 2010 is also over.... Beginning of 2010's End.

Tuesday, November 30, 2010

Some people try to sound too idealists.. that they can not see any positivity in anything.. just look for the loop-holes .... Are they really so very honest in their lives or it is just the habit of 'criticism for the sake of criticism'.

Friday, November 12, 2010

IGI Airport - New Terminal


Immigration counters at IGIA arrival, the different 'mudras' of classical dance in silver with a golden background look awesome.