रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।
फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में
और चारों ओर दुनिया सो रही थी।
तारिकाऐं ही गगन की जानती हैं
जो दशा दिल की तुम्हारे हो रही थी।
मैं तुम्हारे पास होकर दूर तुमसे
अधजगा सा और अधसोया हुआ सा।
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।
Thursday, December 15, 2011
Wednesday, October 12, 2011
शील प्रभात
सुबह की ठंडी हवा
बहा ले जाती है
संग अपने
दूर किसी वादी में,
जहा बहते शील झकोरे
छू जाते है अंतःमन को,
और छोड़ जाते है
इक मीठी सी सिहरन,
साथ रह जाती है जो
मुंदी पलकें
खोलने के बाद भी ।
~ नी रा
बहा ले जाती है
संग अपने
दूर किसी वादी में,
जहा बहते शील झकोरे
छू जाते है अंतःमन को,
और छोड़ जाते है
इक मीठी सी सिहरन,
साथ रह जाती है जो
मुंदी पलकें
खोलने के बाद भी ।
~ नी रा
Sunday, August 21, 2011
जन्नत जहाँ....
Sunday, May 15, 2011
शब्दों की दीवारें
दो शब्द, जो मैंने कहे ही नहीं,
गर कहे होते तो क्या मालूम
तुमने समझे भी होते या नहीं |
हैरां होती हूँ अब ये सोच कर
कैसे वो अनकही सारी बातें
तुम जान लिया करते थे
बिन कहे मेरे |
शब्दों के ताने बाने
शुरू जो हुए बुनने
तो यूँ उलझ जाएँगे
ये कहाँ सोचा था हमने |
बोल जो घुल जाया करते थे
जज्बातों के एहसास में
वही खड़े हैं यूँ बीच में
कंक्रीट कि दीवार जैसे
और इस पार से उस पार का
नहीं तय कर पाते हैं फासला |
यही सोच न कहे होंगे
मैंने वे दो शब्द भी
अक्सर लेकिन
अब सोचा करती हूँ
गर कह दिए होते
तो ढ़ह गई होती शायद
बीच खड़ी
वो शब्दों की दीवारें |
~ नी रा
तुमने समझे भी होते या नहीं |हैरां होती हूँ अब ये सोच कर
कैसे वो अनकही सारी बातें
तुम जान लिया करते थे
बिन कहे मेरे |
शब्दों के ताने बाने
शुरू जो हुए बुनने
तो यूँ उलझ जाएँगे
ये कहाँ सोचा था हमने |
बोल जो घुल जाया करते थे
जज्बातों के एहसास में
वही खड़े हैं यूँ बीच में
कंक्रीट कि दीवार जैसे
और इस पार से उस पार का
नहीं तय कर पाते हैं फासला |
यही सोच न कहे होंगे
मैंने वे दो शब्द भी
अक्सर लेकिन
अब सोचा करती हूँ
गर कह दिए होते
तो ढ़ह गई होती शायद
बीच खड़ी
वो शब्दों की दीवारें |
~ नी रा
Tuesday, April 5, 2011
Baatein - बातें

बातें ही बातें
इधर उधर की बातें
कहाँ कहाँ की बातें
ऐसी वैसी बातें
कैसी कैसी बातें
हँसती गाती बातें
मेरी तुम्हारी बातें
दिल लुभाने वाली बातें
दिल दुखाने वाली बातें
तो कभी कभी दिल को
छू जाने वाली बातें
जाने कहाँ कहाँ से
आ जाती हैं इतनी बातें
और कभी कभी तो जैसे
कहीं खो ही जाती हैं बातें
मुलाकातों में बदलती बातें
रातों में ढलती बातें
जहाँ पर रूकती वहीँ से
फिर शुरू हो जाती बातें
कैसी हैं ये कभी ना
खत्म होने वाली बातें |
~ नी रा
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